Articles

 

Compilation work of the Articles is under progress. A small selection is being provided here.  

Human Race is One, Human Dharma is One

There are three expectations about human dharma (* dharma= religion = that which is innate to an entity is its religion)   the study of human being living with developed (evolved) consciousness, godly consciousness and divine consciousness. The study ...

समझदारी ही सुख

समझदारी से ही कल्याण होगा | समझदारी से ही सुखी समृद्ध होते हैं | समझदारी में वर्तमान में व्यवस्था के रूप में जीते हैं | तभी सह-अस्तित्व को प्रमाणित करते हैं | सुख के चार चरण है, समाधान, समृद्दि, अभय, सह-अस्तित्व | यानि हर मानव में समाधान, परिवार में स...

जीवन विद्या

मानव मूल्य जब हम चरितार्थ करना शुरू करते है, तभी हम सही करने में समर्थ, पारंगत होते हैं | तब तक किसी न किसी उन्माद में जकडे ही रहते है और हमको सही करने का कोई रास्ता मिलता नहीं | इसे ही नासमझी और भटकना कहा है | यही समस्या और दुःख के रूप में दिखाई देता ...

जीवन का स्वरूप

जीवन गठनपूर्ण परमाणु है, चैतन्य इकाई है | इसीलिए इसमें संज्ञानशीलता और संवेदनशीलता का होना पाया जाता है | यह प्राकृतिक विधि से होता है | इसे कोई बनाने वाला, बिगाड़ने वाला है, ये झंझट रहा ही है | इसे लेकर अनेकों मान्यताएं प्रचलित है ही | इसी आधार पर मन...

मानव जाति, मानव धर्म

मानव धर्म के बारे में, तीन आशय समाहित हैं| विकसित चेतना में जीता हुआ मानव, देव मानव, दिव्य मानव का अध्ययन है | चेतना के सन्दर्भ में चार भाग में अध्ययन है,  जीव चेतना, मानव चेतना, देव चेतना, दिव्य चेतना | जीव चेतना विधि से सम्पूर्ण अपराध मानव कर्ता हुआ देखने को मिल...

मानव धर्म एक, मानव जाति एक

परिचय (अजय यादव द्वारा): मानव धर्म एक, मानव जाति एक | अब से पहले शायद ही प्रमाणपूर्वक ऐसा वचन कहा गया है | मध्यस्थ दर्शन के प्रणेता अमरकंटक निवासी 93 वर्षीय दार्शनिक अग्रहार नागराज ने अनुसंधान पूर्वक सम्पूर्ण अस्तित्व को समझा | इसी में मानव का भी अध्ययन...

मानव का मूल्य

दुनिया का प्रत्येक मानव सुखी होकर जीना चाहता है | यही मानव की मूल चाहत है | हर कोई इस चाहत को पूरा करना ही चाहता है | जीवन विद्या अर्थात जीवन ज्ञान, अस्तित्व दर्शन ज्ञान, मानवीयता पूर्ण आचरण ज्ञान समझ में आने पर सुखी होने का रास्ता बनता है | इसमें ही सर्वशुभ ...

 

Madhyasth Darshan